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Himachal Update – मोटर वाहन दुर्घटना मामले को सख्त सुबूत निर्धारित करने की आवश्यकता नहीं।
ऐसे मामलों को कोर्ट और ट्रिब्यूनल को एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े मामलों को दी गई अहम व्यवस्था। इस बीच अदालत का कहना है कि मोटर वाहन दुर्घटना के मामलों को आपराधिक मामले की तरह साबित करने की जरूरत नहीं है। इस बारे में न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को कोर्ट और ट्रिब्यूनल को एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
बताया जा रहा है कि दावेदार को सख्त सुबूत निर्धारित करने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल प्रधानता की कसौटी पर अपना मामला स्थापित करना होता है। अदालत ने कहा कि सुबूत का स्तर संभावनाएं और उचित संदेह से परे साबित किए जाने का सिद्धांत मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में लागू नहीं किया जा सकता है। वाहन दुर्घटना और मुआवजा से जुड़े मामलों का निपटारा करते हुए यह निर्णय सुनाया।



