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Himachal Update:- शहरी के साथ ग्रामीण महिलाएं भी चला रही गाडिय़ां।

हिमाचल में ड्राइविंग के लिए आगे आ रही नारीशक्ति, शहरी के साथ ग्रामीण महिलाएं भी चला रही गाडिय़ां।

हिमाचल में ड्राइविंग के प्रति महिलाओं का क्रेज बढ़ रहा है। प्रदेश में एक लाख से ज्यादा महिलाओं ने वाहनों का स्टीयरिंग थामा है। परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ो के अनुसार प्रदेश में 1470782 लोगों के पास ड्राइविंग लाइसेंस है। इनमें से 1287205 लाइसेंस धारक पुरुष हैं, जबकि 106953 लाइसेंस धारक महिलाएं हैं। वहीं 387 लाइसेंस धारक ट्रांस जेंडर हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि हिमाचल प्रदेश में महिलाएं भी अब ड्राइविंग सीख रही हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पांच साल पहले महिला लाइसेंस धारकों की संख्या सिर्फ गिनीचुनी ही थी, लेकिन पिछले पांच सालों में महिला लाइसेंस धारकों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इससे पता चलता है कि हिमाचल प्रदेश की महिलाएं ड्राइविंग के क्षेत्र में भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की दिशा में अग्रसर हो रही हैं। महिलाएं न सिर्फ छोटी कार चला रही हैं, बल्कि टैक्सियां, एचआरअीसी बसें, ट्रक, यहां तक कि कुछ महिलाएं जेसीबी भी चला रही हैं।

इतना ही नहीं, प्रदेश के कई ड्राइविंग स्कूलों में ड्राइविंग सीखने के लिए महिलाओंं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। एचआरटीसी में तैनात सीमा ठाकुर हिमाचल प्रदेश की पहली महिला बस चालक हैं। पहाड़ की पहली ऐसी महिला है, जिसने शिमला- चंडीगढ़ रूट पर बस चलाकर महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम की है। आम तौर पर पुरुषों को ही बस चलाते हुए देखा होगा, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ, जब सोलन के अर्की की 31 वर्षीय सीमा ने अपने शौक को जुनून में बदल दिया। यह प्रदेश की पहली ऐसी महिला चालक बन गई है, जिसके खाते में नई उपलब्धि हासिल हो गई है। वहीं गाड़ी चलाने वाली महिलाओं में ज्यादातर महिलाएं कामकाजी महिलाएं हैं। इनमें शिक्षक, डॉक्टर, नर्स, महिलाएं, छात्राएं शामिल हैं। खासकर निजी फर्मों में तैनात महिलाओं कर्मचारियों की भी अच्छी खासी तादाद है, जो ड्राइविंग कर रही हैं। दोपहिया वाहन वाहन शोरूम के मालिक मंदीप सिंह ने बताया कि महिलाओं में स्कूटी के प्रति डिमांड बढ़ी है। इससे स्कूटी के बाजार में बूम आया है।

11 हजार ग्रामीण महिलाओं को ड्राइविंग की ट्रेनिंग।

हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की 11 हजार महिलाओं को ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत दिया जा रहा है। इसमें प्रदेश के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हैं। ड्राइविंग सीखने के बाद इन महिलाओं को ड्राइविंग स्कूल शुरू करने के लिए भी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सहायता प्रदान की जाएगी।

Rakesh Bhardwaj

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