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Himachal Update:- उद्योग विभाग-ट्रक यूनियन-अर्की प्रशासन ने बैठक में बनाई रणनीति।

वर्ष 2005 के रेट फार्मूले से सुलझेगा विवाद।

हिमाचल में अंबुजा व एसीसी सीमेंट के प्रबंधक अडानी ग्रुप व ट्रक ऑपरेट्र्स में माल ढुलाई कार्य के रेट को लेकर चल रहे विवाद को अब सूक्ष्म तरीके से की जा रही कैलकुलेशन निपटाएगी। बताया जा रहा है कि सोमवार को प्रदेश उद्योग विभाग, ट्रक ऑपरेटर सहकारी सभाओं के नुमाइंदों व अर्की प्रशासन के बीच त्रिस्तरीय जो बैठक हुई है उसके सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद बन गई है। इसके साथ ही सरकारी नुमाइंदों ने सोमवार को अर्की एसडीएम आफिस पहुंच कर ट्रांसपोर्टर्स से वर्ष 2005 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रेट निर्धारण फार्मूला की दरों पर पूरा फीडबैक लिया। इस बैठक में हालांकि अडानी ग्रुप के शीर्ष प्रतिनिधि नहीं पहुंचे, किंतु इस अनऑफिशियल बैठक में आपसी संवाद से एकत्रित किए गए आंकड़े अब प्रदेश सरकार को जाएंगे।

बताया जा रहा है कि ट्रक ऑपरेटर सोसायटी एसडीटीओ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश गुप्ता ने बताया कि 2005 में रेट निर्धारण को जो फार्मूला था उसके सभी पहलुओं से प्रशासन व सरकार के उद्योग विभाग के प्रतिनिधियों को बता दिया है। उद्योग विभाग से अर्की पहुंचे अधिकारी अमित चोपड़ा ने बताया कि सारे डाटा व कैलकुलेशन को सचिव उद्योग विभाग को एक-दो दिन में भेजा जाएगा। एसडीएम अर्की केशव राम ने बताया कि इस बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी संवाद करके 2005 के फार्मूले पर विस्तृत चर्चा की है।

क्या है रेट निर्धारण फार्मूला।

1. स्थायी खर्चे जिनमें ड्राइवर, क्लीनर का वेतन, कर व बीमा, ब्याज, ह्रास, जीपीएस व फीस इत्यादि शामिल हैं।

2. संचालन खर्चे में डीजल, लूबरीकैंट्स, रिपेयर व टायर शामिल

3. बीएस-6 (प्रदूषण रोकने वाले पुर्जे) को भी हाल ही में इसमें शामिल किया गया है।

कल उद्योग विभाग के सचिव को सौंपेंगे आंकड़े।

  • बताया गया कि प्रदेश उद्योग विभाग के प्रतिनिधि मंगलवार को बरमाणा में भी जाकर वहां की ट्रक ऑपरेटर सोसायटियों से संवाद करके वहां पर लागू रेट निर्धारण फार्मूले का अध्ययन करेंगे। उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अमित चोपड़ा ने बताया कि बुधवार को वह अंबुजा दाड़लाघाट व एसीसी बरमाणा से प्राप्त आंकड़ों को सचिव उद्योग विभाग को सौंप देंगे। सोमवार को अर्की में भी बरमाणा के व दाड़लाघाट के ट्रक ऑपरेटर सोसायटियों की एक गुप्त बैठक अपने स्तर पर भी हुई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी रूपरेखा क्या बनाई जाए, इस पर गहन मंथन हुआ है।
Rakesh Bhardwaj

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