Himachal Update:- विधानसभा का शीतकालीन सत्र पहली बार बिना मंत्रियों के चला।
तपोवन में समस्त मंत्रियों के कमरे में ताले ही लटके रहे।

हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ पहली बार उप-मुख्यमंत्री बने मुकेश अग्रिहोत्री संग आयोजित किया गया। बताया जा रहा है कि राज्य के इतिहास में बिना मंत्रियों के पहली बार विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। इसके साथ ही बताया गया कि तपोवन में समस्त मंत्रियों के कमरे में ताले ही लटके रहे। इतना ही नहीं, मंत्रियों की गैलरी जो कि पूरी तरह से जैम पैक रहती थी, पूरी तरह से सुनसान दिखाई दी, जबकि सीएम व डिप्टी सीएम की गैलरी में सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच गए। .
बताया जा रहा है कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1905 में जिला कांगड़ा में आए भूकंप के चलते धर्मशाला से देश की समर कैपिटल बनने का हक छिन गया था। इसके साथ ही अंग्रेजी हुकूमत ने धर्मशाला को देश की समर केपिटल बनाने के लिए प्रोपोजल तैयार कर लिया था, लेकिन वर्ष 1905 के भयंकर भूकंप ने उस प्रोपोजल को भी दफन कर दिया। बताया गया कि पूरे 100 वर्ष बाद धर्मशाला को वर्ष 2005 में अपना हक वापस मिल पाया था। 2005 में पहली बार धर्मशाला में विधानसभा का सत्र चला।
बताया गया कि पहले सत्र में ऐतिहासिक पीजी कॉलेज धर्मशाला का प्रयास हॉल इसका साक्षी बना था। तब विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर की अध्यक्षता में सत्र आयोजित किया गया था। इसके बाद अब तक तपोवन धर्मशाला में शीत सत्र आयोजित होता रहा है। अब प्रदेश के इतिहास में नया अध्याय जुड़ा है। इस बार मुख्यमंत्री संग उप-मुख्यमंत्री भी सत्र का हिस्सा बन रहे हैं। इससे पहले राज्य के इतिहास में कभी भी उप मुख्यमंत्री का पद नहीं रहा है। वहीं एक ओर अध्याय इस बार तपोभूमि में जुड़ा है और वह यह कि पहली बार राज्य में बिना मंत्रियों के सत्र चल रहा है।



