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Himachal Update:- राजपथ पर इस बार फिर नहीं दिखेगी हिमाचल की झलक।

पत्राचार में देरी से रिजेक्ट हुई प्रदेश की झांकी।

हर साल होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में लगातार तीसरे साल हिमाचल की झांकी नजर नहीं आएगी। बताया जा रहा है कि पत्र मिलने में हुई देरी की वजह से हिमाचल इस झांकी में अपनी एंट्री से चूक गया है। नवंबर महीने से झांकी को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती हैं और केंद्र से पत्र जारी होने के बाद इसका आठ दिन में जवाब देना होता है, लेकिन प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त होने की वजह से भाषा और संस्कृति विभाग तय समय पर जवाब दिल्ली नहीं भेज पाया। इससे हिमाचल एंट्री से भी वंचित रह गया। बताया गया कि हिमाचल प्रदेश की ओर से आखिरी बार जनवरी, 2020 में झांकी का प्रदर्शन दिल्ली में हुआ था। बता दें कि उस समय कुल्लू दशहरा की झांकी प्रदर्शित की गई थी। वहीं पिछले साल आजादी के 75 साल पूरे होने और नारी सशक्तिकरण को झांकी में शामिल किया गया था। इसी पर हिमाचल को मॉडल तैयार करना था। प्रदेश भाषा और संस्कृति विभाग ने मॉडल के लिए धामी के एतिहासिक गोलीकांड को हिस्सा बनाया।

बताया जा रहा है कि यह मॉडल चयन समिति के पास भेजा गया, लेकिन मॉडल में जरूरी सुधार की बात कहकर इसे वापस लौटा दिया। इसके बाद विभाग ने इस मॉडल में अटल टनल समेत दूसरे पर्यटक स्थलों को भी शामिल कर लिया, लेकिन हिमाचल की झांकी तमाम बदलाव के बावजूद स्वीकार नहीं की गई। इस बार प्रदेश में चल रहे चुनाव और पत्राचार में देरी के कारण यह अवसर भी हाथ से फिसल गया है। वहीं पंकज ललित, निदेशक भाषा और संस्कृति ने बताया कि हिमाचल में विधानसभा चुनाव और आदर्श आचार संहिता के दौरान राजपथ में झांकी को लेकर पत्राचार चल रहा था। इस दौरान दिल्ली से पत्र मिलने में देरी हुई। जब तक यह पत्र मिला, आवेदन की तारीख निकल चुकी थी। इस वजह से इस बार हिमाचल प्रदेश की झांकी राजपथ पर नजर नहीं आएगी। अगले साल हिमाचल की झांकी राजपथ पर नजर आए, इसके लिए कड़े प्रयास किए जाएंगे।

हिमाचल को पांच बार मिला मौका।

बताया गया कि हिमाचल की झांकियों में अब तक जनजातीय और प्राचीन संस्कृति की झलक राजपथ पर देखने को मिली है। हिमाचल की झांकी पांच बार राजपथ पर नजर आई है। इनमें लाहुल-स्पीति, किन्नौर, चंबा और कुल्लू की संस्कृति और परिवेश पर तैयार की गई झांकियों को केंद्र सरकारों ने मंजूरी दी है, जबकि अटल टनल, महात्मा गांधी के हिमाचल दौरे और धामी गोलीकांड जैसे संवेदनशील मुद्दों पर तैयार झांकियों को जगह नहीं मिल पाई है। पहली बार 2007 में लाहुल-स्पीति के परिवेश को अवसर मिला था। 2012 में किन्नौर व 2017 में चंबा की सांस्कृतिक झलक देश भर के लोगों को देखने को मिली थी। 2018 में एक बार फिर लाहुल-स्पीति के कीह गोंपा की झांकी राजपथ पर नजर आई थी, जबकि 2020 में कुल्लू दशहरा की झांकी को प्रदर्शित किया गया।

Rakesh Bhardwaj

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