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Himachal Update:- प्रदेश के कई स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनों के लिए नहीं है बजट।

सुविधा को शिक्षा विभाग से कर रहे डिमांड।

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में शिक्षा विभाग ने बायोमीट्रिक मशीनें लगाने के निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन इन मशीनों को लगाने के लिए अधिकतर स्कूलों के पास बजट ही नहीं है। बताया गया कि ऐसे में स्कूल की ओर से शिक्षा विभाग से डिमांड की जा रही है कि मशीनें इंस्टाल करने के लिए विभाग बजट मुहैया करवाए। इसके साथ ही मशीनों की खरीद के लिए बजट भी अधिकांश स्कूलों के पास उपलब्ध नहीं है और खराब हुई बायोमीट्रिक मशीनें भी मरम्मत करवाने के लिए न इंजीनियर्स आते हैं और न ही मरम्मत के बिल अदा करने के लायक बजट उपलब्ध है।

बताया जा रहा है कि बायोमीट्रिक उपस्थिति में सबसे बड़ी बाधा उन स्कूलों की है, जिनमें अब तक बिजली ही उपलब्ध नहीं है, क्योंकि स्कूलों के नाम भूमि न होने के चलते आज तक कई स्कूलों को बिजली का कनेक्शन विद्युत विभाग ने नहीं दिया है। साथ ही इसके अलावा समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों को दी जा रही ग्रांट भी नाकाफी साबित हो रही है। स्कूलों के पास इतना बजट भी नहीं हो पा रहा है कि वे बिजली के बिल भर सकें, जिसके चलते कुछ दिन पहले स्कूलों के बिजली कनेक्शन तक काटने के मामले उभरे हैं। ऐसे में समग्र शिक्षा अभियान इस बारे में पर्याप्त बजट की व्यवस्था करे। इसकी मांग राजकीय प्रशिक्षित कला स्नातक संघ प्रदेश महासचिव ने प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा अभियान निदेशक से की है।

इस बीच उन्होंने कहा है कि दो वर्ष पूर्व समग्र शिक्षा अभियान ने सभी स्कूलों से एसएसए की उपयोग न हुई राशि व खातों का ब्याज वापस ले लिया था। यह करोड़ों रुपये की राशि है, जिससे बायोमीट्रिक मशीनों की खरीद और मरम्मत संभव है, जबकि 10 हज़ार रुपए अनुदान में ही गुज़ारने को विवश स्कूलों में बिजली बिल भुगतान और इंटरनेट, कम्प्यूटर्स आदि की व्यवस्था करने के लिए बजट दिया जाना चाहिए। स्कूलों को दी जा रही कंपोजिट ग्रांट की दस हज़ार राशि का बड़ा भाग बिजली बिलों के भुगतान में चला जाता है और स्कूल की मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बजट नहीं हो पाता है। साल में चार आवधिक परीक्षाएं और दो छमाही परीक्षाएं ली जा रही हैंं, जिनके प्रश्नपत्रों का खर्चा भी बहुत होता है। मिडल स्कूलों में कम अनुदान और कम्प्यूटर, इंटरनेट और प्रिंटर न होने के चलते व्यवस्था चलाना जटिल है और ऐसे में समग्र शिक्षा अभियान की ग्रांट भी रिवाइज की जानी चाहिए।

Rakesh Bhardwaj

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