Himachal Update:- शिक्षकों के पद भरे होते तो बंद नहीं होते स्कूल।

हिमाचल प्रदेश में पूर्व भाजपा सरकार द्वारा शिक्षकों की भर्ती किए बिना ही स्कूल खोल दिए गए, जिसे अब प्रदेश सरकार डिनोटिफाई किया गया है। अगर पूर्व सरकार द्वारा शिक्षकों की भर्ती कर स्कूल खोले होते, तो आज स्कूलों को डिनोटिफाई करने की नौबत नहीं आती। बताया गया कि यह बात हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य संरक्षक रामसिंह राव ने कही। उन्होंने प्रदेश में अप्रैल , 2022 के बाद खुले स्कूलों को बंद करने के फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि पूर्व सरकार द्वारा स्कूल तो खोल दिए गए पर अध्यापक नहीं भरे गए।
बताया गया कि जिन स्कूलों में बच्चे थे, वहां से अध्यापक बदल कर नए स्कूलों में लगा दिए गए और पद रिक्त कर दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 5000 शिक्षकों के पद रिक्त चले हैं और 5000 से ऊपर एनटीटी अध्यापकों के पद रिक्त हैं। अगर पूर्व सरकार ने स्कूल खोलने से पहले अध्यापकों के रिक्त पदों को भरा होता, तो नए खुले हुए स्कूल बंद नहीं करने पड़ते। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बहुत से प्राथमिक स्कूल बिना अध्यापकों के डेपुटेशन पर चले हैं और बहुत से स्कूल एक अध्यापक के सहारे हैं। वहीं बहुत से नए स्कूल ऐसे खोले गए हैं, जहां पर एक भी दाखिला नहीं हुआ है और कुछ स्कूलों में दो-तीन बच्चे ही दाखिल हो पाए हैं। वहां पर अध्यापक छह महीनों से खाली बैठे हैं।
प्रधानाचार्यों को जल्द नियमित करे सरकार।
शिमला।
बताया गया कि मुख्याध्यापक व प्रधानाचार्य कैडर अधिकारी संघ ने प्रदेश सरकार से 2017 से अब तक जो प्रधानाचार्य नियमित नहीं हुए, उन्हें नियमित करने की मांग उठाई है। इसके अलावा संघ ने सरकार से प्रदेश हाई स्कूलों में लिपिक का एक-एक पद सृजित करने भी मांग की है। इसके साथ ही बताया गया कि हिमाचल प्रदेश मुख्याध्यापक व प्रधानाचार्य कैडर अधिकारी संघ की रविवार को एक बैठक आयोजित की गई।



