Himachal Update:- दुनिया में महकेगा कुल्लू का लाल चावल।
प्राचीन अनाज को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा कृषि विश्वविद्यालय।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला का प्राचीन अनाज अब हाई स्तर पर विख्यात होगा। राष्ट्रीय स्तर पर कुल्लू के अनाज को पहचान करवाने की पहल कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इसके लिए कुल्लू के लाल चावल लिए गए हैं। कुल्लू के लाल चावल को भौगोलिक संकेत प्राप्त करने की तैयौरी में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर है। हालांकि कुल्लू का लाल चावल लुप्त हो रहा था, लेकिन अब इस अनाज को फिर से बढ़ावा देने के लिए कृषि विश्वविद्यालय पहल कर रहा है।
बताया जा रहा है कि लाल चावल की फसल पहले जिला कुल्लू के कई स्थानों होती थी, लेकिन अब जिला की ऊझी घाटी यानी मनाली के गांवों में ही इस फसल पर कृषकों का ध्यान है। साथ ही प्राकृतिक खेती को तव्वजों सरकार द्वारा दी जा रही है। अब कुल्लू जिला के कृषकों के लिए खुशी की बात यह है कि कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर फसलों के लिए भौगोलिक संकेत प्राप्त करने की तैयार कर रहा है। इसमें प्रदेश के अन्य अनाजों के साथ कुल्लू के लाल चावल को भी लिया गया है।
इसके साथ ही बताया गया कि कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने प्रदेश के कुल्लू, कांगड़ा और मंडी क्षेत्र के लाल चावल चावल को जीआई प्राप्त करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। यह तीनों जिलों के कृषकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जिला कुल्लू कृषि और बागबानी के लिए मशहूर जिला है। ऐसे में कुल्लू जिला के लाल चावल को लिया है। इससे आने वाले समय में इसकी खेती फिर से बढ़ सकती है। भरमौर, बरोट और किन्नौर के राजमाश तथा औषधीय उत्पाद लाहुल-स्पीति और किन्नौर से एफिड्स हनी ड्यू, स्पीति से छरमा को जीआई के लिए सूचीबद्ध किया है। चावल, जौ, राजमाश, कुल्थी व माह जैसी अच्छी फसलें हैं। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में खानपान और परिधानों में बहुत विविधता है। इस सारी विविधता को जियोलॉजिकल इंडिकेशन (जीआई) बनता है। इनकी अलग पहचान है।



