Himachal Update:-फ्रंटलाइन वर्कर-समुदाय की मदद से रोकेंगे जंगल की आग।
वन बचाने को चार राज्यों का प्लान, हिमाचल, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के अधिकारियों ने की चर्चा।

हिमाचल प्रदेश में जंगल की आग रोकने में फ्रंटलाइन वर्कर और समुदाय के योगदान की जरूरत है। यह बात हिमालयन फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट के प्रभारी निदेशक डा. संदीप शर्मा ने कही। बताया गया कि वह शुक्रवार को जंगल में आग नियंत्रित करने को लेकर आयोजित चार राज्यों की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जंगलों में आग दशकों से एक न मिटाई जा सकने वाली और बढ़ती हुई चुनौती रही है।
बताया जा रहा है कि इस आपदा के कारण होने वाली आर्थिक और पारिस्थितिक बहुत बड़ी क्षति है। हालांकि जंगल की आग से निपटने, उसे कम करने और प्रतिक्रिया देने के लिए प्रणालियां मौजूद हैं। इसके साथ ही इन्हें अभी भी इसे पूर्ण प्रमाणिक बनाना है, इसमें सभी हितधारक शामिल हों। कार्यशाला को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से वित्त पोषित किया गया था। जो भारत में आपदा प्रबंधन के लिए शीर्ष निकाय है।
बताया जा रहा है कि हिमाचल वन विभाग, जम्मू और कश्मीर वन विभाग, उत्तराखंड और पंजाब वन विभाग सहित हिमाचल दमकल विभाग के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर निदेशक डा. संदीप शर्मा ने कहा कि जंगल की आग रोकने के लिए समुदाय की भूमिका अहम है। बताया जा रहा है कि इस मौके पर जेटी एनडीएमए के सचिव कुणाल सत्यार्थी ने उनके द्वारा विकसित और समर्थित की जा रही नवीन योजनाओं और पहलों के साथ-साथ जंगल की आग के प्रति एनडीएमए की भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि विकासशील देशों में भारत पहला देश है, जिसके पास ऐप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रूप में आपदाओं के बारे में अलर्ट सिस्टम है। पीसीसीएफ और एचओएफएफ अजय श्रीवास्तव ने हिमाचल प्रदेश वन विभाग ने जंगल की आग से संबंधित बुनियादी।



