500 किलोवाट का हाइडल प्रोजेक्ट को 6 साल से ज्यादा समय के बाद भी प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

धर्मशाला। राकेश भारद्वाज
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत बोह पंचायत में साल 2016 में 500 किलोवाट का हाइडल प्रोजेक्ट मंजूर हुआ था। इसके मालिक कर्ण सिंह परमार(पिंटू) और जरम सिंह हैं। इसके जीएम विपुल कुमार हैं। इस प्रोजेक्ट को पिछले 6 साल से ज्यादा समय के बाद भी प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है, जबकि प्रोजेक्ट प्रबंधन ने सारी औपचारिकताएं पूरी की हैं।
प्रोजेक्ट प्रबंधकों ने बताया कि 19 दिसंबर 2016 को हिमाचल सरकार की एजेंसी हिम ऊर्जा ने इस प्रोजेक्ट को अनुमति दी है। इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट 9 अक्टॅूबर 2017 को मंजूर हुई थी। इसी साल उपायुक्त कांगड़ा ने एनओसी लेने के लिए इन्हें लैटर जारी किया था। प्रोजेक्ट मालिकों ने 9 विभागों से एनओसी ली है,लेकिन प्रबंधकों को एसडीएम शाहपुर ने एनओसी नहीं दी।
इसकी ज्वाइंट इंस्पेक्शन का मौका डीएफओ धर्मशाला, एसडीएम शाहपुर के साथ 27 फरवरी 2018 को रखा गया था। हैरानी की बात है कि नौ विभागों ने अनुमति दे दी। इसमें डीएफओ, पटवारी, तहसीलदार,आरओ, पीडब्ल्यूडी आदि ने लिखा है कि प्रोजेक्ट उचित है, लेकिन तत्कालीन एसडीएम शाहपुर ने ज्वाइंट इंस्पेक्शन नहीं की। साथ ही इस प्रोजेक्ट को एनओसी नहीं दी। प्रोजेक्ट प्रबंधकों का कहना है कि ज्वाइंट इंस्पेक्शन को दरकिनार करते हुए तत्कालीन एसडीएम शाहपुर ने स्पाट इंस्पेक्शन करके ही उनकी अनुमति नहीं दी, जबकि कायदे अनुसार ज्वाइंट इंस्पेक्शन की जानी थी। प्रोजेक्ट प्रबंधकों के अनुसार उनके पास प्रोजेक्ट से जुड़ी हर औपचारिकता पूरी है। इन छह साला में प्रोजेक्ट प्रबंधकों का करीब 60 लाख रुपए विभिन्न कार्रवाइयों पर खर्च हुआ है। करीब आठ करोड का यह प्रोजेक्ट है। इसमें करीब 15 लोगों को पक्की और हजार के करीब अस्थायी लोगों को रोजगार मिलना है। समय पर अनुमति मिल गई होती तो अब तक दो करोड़ 65 लाख की इन्कम जेनरेशन होनी थी। जिला प्रशासन से आग्रह है कि इस प्रोजेक्ट को तुरंत अनुमति प्रदान की जाए।
जिला प्रशासन से गुहार
इसके बाद प्रोजेक्ट प्रबंधकों ने न्याय पाने के लिए उपायुक्त कांगड़ा से चार बार लिखित पत्राचार किया और दो बार मौखिक पत्राचार किया।



