आईएचएसडीपी स्कीम के तहत निर्मित 144 मकान पूरी तरह लापरवाही और घटिया क्वालिटी के कारण लगे टूटने

न्यूज अजब गजब, (राकेश भारद्वाज) धर्मशाला,
धर्मशाला में आईएचएसडीपी स्कीम के तहत चराण खड्ड के नजदीक शहरी गरीब एवं बेघर लोगों के लिए निर्मित 144 मकान पूरी तरह लापरवाही और निर्माण में घटिया क्वालिटी की सामग्री के लगे टूटने लग कारण पड़े हैं। 15 साल के लंबे अंतराल शहरी गरीबों को अपना आशियाना तो मिला पर मकान टूटने लगे। अभी मकान हैंडओवर किए छह माह का ही समय हुआ है और मकान की छतें उखड़ने लग पड़ी हैं तो पाइप और पिलर भी टूट-फूट गए हैं। यहां रह रहे शहरी गरीब लोगों ने मकानों के निर्माण में बरती गई लापरवाही और घटिया क्वालिटी की सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें धर्मशाला नगर निगम सहित अन्य प्रशासन के अधिकारियों से की लेकिन किसी भी अधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया। संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मचारी इन घरों का मुयाना कर गए। अधिकारी निर्माण में बरती गई अनियमितताओं को लेकर मौन धारण किए हुए हैं और कहते हैं नो कमेंट। केंद्र सरकार की एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम (आईएचएसडीपी) के तहत निर्मित मकान शहरी गरीब एवं बेघर लोगों को धर्मशाला में 15 साल बाद मिले हैं। योजना के तहत एक परिवार के लिए एक कमरा, एक किचन और लैट्रिन-बॉथ बनाए गए हैं, पर इनके निर्माण में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा गया है। जिन मकानों को रंग-रोगन कर आवंटन कर दिया गया है, उनके प्लास्टर निकल रहे हैं। फर्श पर ढलान ही नहीं होने से जगह-जगह पानी रुक रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि कई जगह मकानों का रंग निकल गया है। वहीं नीचे की मंजिल में दीवारों से पानी रिस रहा है तो सबसे ऊपर की मंजिल में छत से पानी अंदर आ रहा है।
गुणवत्ता का ध्यान नहीं
मकान निर्माण में गुणवत्ता का कितना ध्यान रखा गया है यह वहां लगे पाइप और आरसीसी से बनाए गए पिलर ही बता रहे हैं। बरसात और बाथरूम के पानी को बाहर निकालने के लिए लगाए गए पाइप अभी से ही टूट गए हैं। उनके लिए इस घटिया सामग्री को बार-बार बदलने पर खर्च करना ही होगा।
शहरी गरीबों के लिए एक कमरे के घरों के निर्माण
धर्मशाला में चराण खड्ड के निकट केंद्र सरकार की स्कीम आईएचएसडीपी के जरूरतमंद परिवारों के लिए 163 मकानों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित था। इसके लिए वर्ष 2006-2007 में हुए सर्वे के अनुसार 156 मकानों का निर्माण किया जाना था। केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में तत्कालीन नगर परिषद को करीब 3.87 करोड़ की राशि मंजूर की थी। पहले तो भूमि के चयन को लेकर मामला कई वर्षों तक लटकता रहा। बाद में भूमि चयन होने पर वर्ष 2016 में निदेशक शहरी नगर निकाय हिमाचल प्रदेश ने फरवरी 2016 को 9.45 करोड़ रुपए का टेंडर लगाया था। यह कार्य शुरू होने से करीब छह माह में ही पूरा होना था, लेकिन मौजूदा हालात ये हैं कि अभी तक 144 मकान ही तैयार हो पाए हैं।
गरीब परिवारों ने जमा करवाए हैं डेढ़ लाख रुपए
तत्कालीन धर्मशाला नगर परिषद ने वर्ष 2008 में शहरी गरीब एवं बेघर लोगों को अलॉटमेंट के लिए प्रार्थना पत्र आमंत्रित किए थे। इसके बाद नगर परिषद को लोगों के आवेदन मिले और इनसे एक मकान का डेढ़ लाख रुपए लेना था। 21 जून 2019 में धर्मशाला नगर निगम ने चयनित गरीब एवं बेघर लोगों को पत्र लिखकर सूचित किया कि उनका चयन वर्ष 2008 में इंटिग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत आवास आबंटन के लिए हुआ था। अतः इस योजना के तहत आवास बन के तैयार हैं। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 1.5 लाख रुपए नगर निगम में जमा करवाने के बाद ही मकान आवंटित किये गए।
क्या कहते हैं यहां रहने बाले
ब्लॉक सी के मकान 204 में रहने बाली उषा देवी ने बताया की घटिया निर्माण सामग्री के कारण उनके बाथरूम और किचन की छतें उखड़ कर गिर चुकी हैं। दीवारों का पेंट खराव हो चुका है। इसी तरह ब्लॉक सी के मकान नंबर 205 में रहने बाले दीपक, 203 में रहने बाली सत्य देवी, 105 कांता ने बताया कि उनके भी बाथरूम,किचन और कमरे का प्लास्टर उखड़ गया है। दीवारों में सीलन है। प्लास्टर में सीमेंट नहीं बल्कि कार्ड बोर्ड का इस्तेमाल किया गया है। ब्लॉक बी के मकान 206 सुनीता शर्मा और 205 की मंजू देवी ने बताया कि बरसात और बाथरूम के पानी को बाहर निकालने के लिए लगाए गए पाइप अभी से ही टूट गए हैं। फर्श पर ढलान ही नहीं होने से जगह-जगह पानी रुक रहा है। पिलर में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं जिससे छज्जे गिरने का खतरा है।



