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टीएमसी में सीनियरों ने जूनियरों के कपड़े उतरवाए, 14 साल पुराने अमन काचरू प्रकरण से सबक नहीं

एमबीबीएस छात्रों की करतूत, 14 साल पुराने अमन काचरू प्रकरण से सबक नही

ब्यूरो, न्यूज अजब गजब (कांगड़ा)

2009 के अमन काचरू रैगिंग प्रकरण के 14 साल बाद टांडा मेडिकल कालेज (टीएमसी) में एक बार फिर रैगिंग का जिन्न जागा है। टीएमसी में एमबीबीएस के आठ सीनियर प्रशिक्षु डाक्टरों ने नए बैच के प्रशिक्षु डाक्टरों की रैगिंग कर डाली है। बताया जा रहा है कि सीनियरों ने जूनियर प्रशिक्षुओं को कुछ असाइनमेंट दी थीं, जिन्हें करने से इन्होंने मना कर दिया। इसके बाद सीनियर प्रशिक्षु डाक्टरों ने जूनियरों के कपड़े उतरवा दिए और उनकी रैगिंग की। मामला गत रविवार का है। घटना के बाद जूनियर सहम गए, लेकिन दो प्रशिक्षु डाक्टरों ने हिम्मत जुटाकर टांडा मेडिकल कालेज प्रशासन व प्रधानाचार्य कार्यालय में शिकायत दर्ज कर दी।

प्रशासन ने तुरंत एंटी रैगिंग कमेटी में इस मामले को रखा तथा रैगिंग करने वाले एमबीबीएस बैच 2020 व 2022 के आठ प्रशिक्षु डाक्टरों पर 50-50 हजार का जुर्माना लगाया और उन्हें तीन महीनों के लिए क्लासेज से निष्कासित करने के साथ- साथ छह महीनों के लिए होस्टल से भी निष्कासित कर दिया। 50 हजार की जुर्माना राशि को सात दिनों के भीतर जमा करने के आदेश दिए गए हैं।
अगर जूनियर प्रशिक्षु डाक्टर प्रशासन से शिकायत न करते, तो यह मामला बिगड़ भी सकता था। हैरान कर देने वाली बात है कि पूरे भारत को झकझोर देने वाले अमन काचरू प्रकरण के बाद भी टीएमसी में ऐसा रैगिंग का मामला सामने आया है। तब सात मार्च, 2009 को टीएमसी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 19 वर्षीय प्रशिक्षु डाक्टर अमन काचरू को होस्टल में रैगिंग के दौरान उसके सहपाठियों संग चार वरिष्ठ छात्रों ने बुरी तरह पीटा था। चोटों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराए जाने के अगले दिन अमन काचरू की मौत हो गई थी। अदालत ने अमन काचरू की रैगिंग करने वाले चारों छात्रों को भारतीय दंड संहिता की दफा 304, 452 और 34 के तहत दोषी ठहराते हुए चार साल का कठोर कारावास दिया था। रैगिंग की इस घटना ने पूरे देश में टीएमसी को शर्मसार किया था। उस मामले के 14 साल बाद टीएमसी में एक बार फिर रैगिंग का मामला सामने आने से प्रशिक्षु डाक्टर बहुत डरे हुए हैं और अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। अब टीएमसी की एंटी रैगिंग कमेटी को बहुत चौकन्ना रहना होगा, क्योंकि एक तरफ तो रैगिंग को रोकना होगा, दूसरे शिकायत करने वाले प्रशिक्षु डाक्टरों की भी हिफाजत करनी पड़ेगी। उधर, टांडा मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा. भानु अवस्थी ने कहा की रैगिंग का मामला सामने आया है और दोषियों को एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सजा दी गई है।

Rakesh Bhardwaj

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