पूजा से पहले वन विभाग को चढ़ावा ?
धर्मशाला के युवक ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया,सीएम,राज्यपाल को पत्र लिखकर इस शुल्क को हटाने की लगाई गुहार

धर्मशाला, (ब्यूरो) न्यूज़ अजब गजब :-
धर्मशाला की त्रियूंड कैंपिंग साइट में जाने पर वन विभाग द्वारा लगाए शुल्क का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लोगों में इस बात को लेकर भी रोष है कि वन विभाग कोई सुविधा तो दे नहीं रहा है तो फिर शुल्क किस चीज का लिया जा रहा है। इससे भी हैरान करने वाली बात यह कि इस साइट पर शिव मंदिर, माता कुनाल पथरी, लाम डल, नाग डल आदि कई मंदिर हैं, लेकिन अब लोगों को पूजा करने जाने के लिए भी शुल्क देना पड़ रहा है। इसको लेकर स्थानीय युवक अभिषेक भारती ने डीसी कांगड़ा, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, सीएम हिमाचल प्रदेश, वन मंत्री हिमाचल व हाई कोर्ट, राज्यपाल सहित संबंधित सभी विभागों को ई-मेल करके इस शुल्क को बंद करने की मांग है। अभिषेक भारती ने लिखा है कि वह हर शनिवार को त्रियूंड के शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए जाता है, लेकिन वन विभाग द्वारा वहां जाने से पहले दो सौ रूपए का शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस प्रकार के टैक्स पर रोक लगाई जाए, क्योंकि यह लोगों की धार्मिक भावना का उल्लंघन है।
बिना सुविधा किस चीज की फीस
वन विभाग ने त्रियूंड कैंपिंग साइट को जाने के लिए एंट्री फीस रख दी। सबसे से बड़ी हैरानी इस बात की है कि इस साइट पर वन विभाग की ओर कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही तो विभाग किस चीज का शुल्क ले रहा है। इसको लेकर हर कोई असमंजस में हैं।
मैकलोडगंज का व्यापार मंडल भी जता चुका है विरोध
धर्मशाला के त्रियूंड में लगाए जाने वाले टेक्स के खिलाफ मैकलोडगंज व्यापार मंडल भी आवाज उठा रहा है। मैक्लोडगंज धर्मशाला एडवेंचर के अध्यक्ष आकाश नेहरिया का कहना है कि जो फीस ईको टूरिज्म ने तय की हैं। यह फीस तर्कसगत नहीं है। उधर अपर धर्मशाला होटल एंड रेस्टोरेंट के अध्यक्ष अश्वनी बाबा ने कहा है। कि टेंटिंग व इंट्री फ़ीस काफी ज्यादा निर्धारित की गए हैं। यह फीस कम से कम होनी चाहिए। जबकि स्थानीय लोगों के लिए कोई शुल्क नहीं होना चाहिए



