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धर्मशाला में महिला नेत्रियों को टिकट नहीं देती भाजपा कांग्रेस ने भी अब तक एकमात्र चंद्रेश कुमारी पर जताया भरोसा

भाजपा में गायत्री कपूर समेत कई बड़े नाम कांग्रेस में सविता कार्की का प्रोफाइल सबसे बड़ा

 

इस बार नारी शक्ति को दोनों दलों से बड़ी उम्मीद

  • ब्यूरो, न्यूज अजब गजब, धर्मशाला 

सियासत में महिलाओं के हक के लिए बड़े-बड़े दावे जरूर होते हैं, लेकिन हकीकत यही है कि विधानसभा या लोकसभा में चुनिंदा ही महिलाएं पहुंच सकी हैं। मौजूदा 14 वीं विधानसभा के 68 विधायकों में एकमात्र महिला एमएलए सिरमौर के पच्छाद से रीना कश्यप हैं। लेकिन अब जमाना बदल रहा है। देश के प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं को राजनीति में आगे लाने की बात कर रहे हैं, तो महिला नेत्रियों को बड़ी आस बंध गई है। हिमाचल में चार लोकसभा सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, तो 6 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इन सीटों में धर्मशाला हलका भी शामिल है। कांग्रेस विधायक सुधीर शर्मा के अयोग्य घोषित होने के बाद अब धर्मशाला में उपचुनाव को लेकर टिकट के चाहवान अपनी जुगत भिड़ा रहे हैं। इनमें पुरुषों के अलावा भाजपा-कांग्रेस से महिला नेत्रियां भी हैं, जो मौका मिलने पर अपनी पार्टी को जिता सकती हैं। भाजपा ने धर्मशाला से आज तक किसी महिला को टिकट नहीं दी है, जबकि कांग्रेस ने चंद्रेश कुमारी को टिकट दी थी। मौजूदा परिदृश्य में पहले भाजपा की बात करें, तो यहां गायत्री कपूर, आशु बलौरिया व तेजेंद्र कौर समेत कई बड़े नाम हैं। गायत्री कपूर की बात करें, तो उनका प्रोफाइल बहु बड़ा है। वह मौजूदा समय में कांगड़ा संगठनात्मक जिला की उपाध्यक्ष हैं। इसके अलावा गायत्री कपूर महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष, महिला मोर्चा प्रदेश कैशियर, चंबा जिला में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की प्रभारी रह चुकी हैं। गायत्री कपूर जिला परिषद सदस्य, केसीसी बैंक की नोमिनेटेड डायरेक्टर रह चुकी हैं। वह प्रदेश सचिव महिला मोर्चा व प्रभारी चंबा व पालमपुर भी रह चुकी हैं। वह कई गद्दी यूनियनों से जुड़ी रही हैं। एक बड़ी यूनियन की प्रेजिडेंट महिला विंग भी बरसों तक रही हैं। वह अभी धौलाधार सोसायटी की वाइस प्रजिडेंट हैं। वह कहती हैं कि उन्हें सिर्फ भाजपा के लिए काम करना है। टिकट देना या न देना हाइकमान का काम है। वह पार्टी की सच्ची सिपाही हैं, उन्हें जो जिम्मा मिलेगा, वह उसे पूरा करेंगी। भाजपा में ही एक अन्य नेत्री आशु बलौरिया हैं, जो नशे के खिलाफ मुहिम में बड़ा चेहरा हैं। वह हर मसले पर बेबाकी से राय रखती हैं। भाजपा से ही तेजेंद्र कौर तीन बार पार्षद रही हैं। इसके अलावा भाजपा में और कई काबिल नेत्रियां हैं। बात कांग्रेस की करें, तो धर्मशाला में कांग्रेस के पास सविता कार्की सबसे बड़ा नाम हैं। वह पांच बार की पंचायत प्रधान व अभी पार्षद हैं। अविवादित लीडर बनकर धर्मशाला शहर के बड़े सोशल इवेंट धुम्मूशाह मेले को उन्होंने किस कद्र बड़ा बनाया है, यह सब जानते हैं। सविता कार्की के अलावा नगर निगम मेयर नीनू शर्मा व पूर्व मेयर रजनी आदि कई बड़े नाम हैं। अब सवाल यही है कि क्या भाजपा और कांग्रेस महिलाओं के हित में की जाने वाले दावों को जमीनी स्तर पर पूरा करेंगी। कुल मिलाकर 90 बूथ वाले धर्मशाला हलके में महिला वोटरों की संख्या काफी है। ऐसे में नारी शक्ति को कैसे बड़े दल सियासी प्रतिनिधित्व देते हैं, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा।

Rakesh Bhardwaj

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