कांगड़ा से दूरी सरकार के लिए पड़ गई भारी,
लोकसभा के साथ धर्मशाला उपचुनाव में सरकार होने के वावजूद हारे कांग्रेस प्रत्याशी

:- कांगड़ा-चंबा से भेदभाव के आरोपों को दूर नहीं कर पाई सरकार, आत्म चिंतन करने की जरूरत
धर्मशाला, ब्यूरो (न्यूज अजब गजब):-
हिमाचल प्रदेश में करीब 15 महीने पहले कांग्रेस की सरकार ने सत्ता संभाली थी। उस समय कांगड़ा जिला के दस विधायकों को जिताकर लोगों शिमला भेजा था, लेकिन जब प्रदेश मंत्रीमंडल गठन की बात आई तो कांगड़ा को कम तवज्जो दी गई थी, उसी समय राजनीतिक गलियारों में कांगड़ा से भेदभाव को आरोप लगने शुरू हो गए थे। हालांकि सीएम सुक्खू ने आते ही कांगड़ा को टूरिज्म कैपिटल बनाने का एलान कर दिया था, लेकिन टूरिज्म कैपिटल की दिशा में काम आगे बढ़ता, प्रदेश में उपचुनाव और लोकसभा चुनाव आ गए। वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने कांगड़ा से कम मंत्री बनाए जाने के मुद्दे को खूब उछाला था और लोकसभा और उपचुनाव में इसे कैश भी कर लिया है। इसके अलावा पिछले प्रदेश सरकारें शीतकालीन प्रवास पर जिला कांगड़ा में आती रही हैं, लेकिन सुक्खू सरकार इस रिवायत को आगे नहीं बढ़ा पाई, इससे भी लोगों में प्रदेश सरकार के प्रति खासी नाराजगी देखने को मिली। जिला कांगड़ा के प्रबुद्ध लोगों की मानें तो लोगों में प्रदेश सरकार के खिलाफ इस बात को लेकर भी रोष था कि पहले सीएम समेत तमाम मंत्री धर्मशाला स्थित सचिवालय में भी कुछ दिन बैठते थे, जिसके चलते सरकार तक लोगों की आसान पहुंच हो जाती थी, लेकिन सुक्खू सरकार ऐसा करने में भी नाकाम रही है।
सीयू मुद्दे को लटकाना पड़ा महंगा
इसके अलावा धर्मशाला में बनने वाले केंद्रीय विवि के कैंपस को लेकर लोग कई बार सीएम से गुहार लगाते रहे, लेकिन सीएम रि-असेस्मेट के तर्क देते रहे, लिहाजा सीएम के तर्कों से लोग सतुष्ट नहीं हो पाए, नतीजतन लोगों में आक्रोश बढ़ता गया और चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ जनादेश चला गया।
आत्म मंथन करने की जरूरत
इस बार के लोकसभा और प्रदेश के विधानसभा उपचुनावों में मोदी मैजिक नहीं चला, क्योंकि प्रदेश की दूसरी 4 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया लेकिन कांगड़ा से लोकसभा और विधानसभा सीटें हारना यहीं संकेत देता है कि प्रदेश सरकार को आत्म चिंतन करना चाहिए कि आखिर 11 विधायक होने के बाद भी हार कैसे हो गई। हिमाचल के अन्य विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की है, कांगड़ा चंबा में क्यों पिछड़े इस पर मंथन करने की जरूरत है। …



