हीटवेव से धान की पनीरी सूखी, फलदार पौधे मुरझाए
हिमाचल में खेती-बागबानी को भारी नुकसान की आशंका, 44 डिग्री तपते पारे से किसान मायूस

:– एक्सपर्ट ने माना, बागबानी को हो रहा नुकसान, आंकड़े जुटाए जाएंगे
धर्मशाला, ब्यूरो (न्यूज अजब गजब):-
हिमाचल में साढ़े नौ लाख किसानों और पांच लाख बागबानों को सूर्यदेव ने रुला दिया है। प्रचंड गर्मी के स्पैल ने खेती और बागबानी को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेती की बात करें, नकदी सब्जियां सूखने के कगार पर हैं, तो छोटे फलदार पौधों को भारी नुकसान हुआ है। इससे नए बागीचे लगाने वाले बागबानों को बहुत ज्यादा क्षति उठानी पड़ी है। आम, सेब, निंबू प्रजाति के फलों की नर्सरियां सूख गई हैं, तो 44 डिग्री तक चल रहे पारे से धान की पनीरी और मक्की के खेत झुलस गए हैं। जानकारी के अनुसार
हिमाचल प्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को प्रदेश के आठ जिलों ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, मंडी और सिरमौर में लू चली। सूबे के नौ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ज्यादा रिकॉर्ड हुआ। लगातार बढ़ रही गर्मी ने जनजीवन बेहाल कर दिया है। न्यूनतम पारा चढऩे से रात को भी राहत नहीं मिल रही है। 17 जून तक प्रदेश में लू चलने के आसार हैं। 18 जून से प्रदेश में प्री मानसून की बौछारें पडऩे से कुछ राहत मिलने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में 18 से 21 जून तक बारिश के आसार हैं। जून के अंत तक प्रदेश में मानसून के प्रवेश करने का पूर्वानुमान है।
फलदार पौधों को नुकसान हुआ है। हीटवेव बहुत ज्यादा है। जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा है, वहां बागबानों को लाइफ सेविंग सिंचाई करनी चाहिए। साथ ही ग्रास की मलचिंग भी करनी चाहिए।
डा कमलशील नेगी, डिप्टी डायरेक्टर, हार्टीकल्चर
हीट वेव से खेती खासकर पनीरी को बचाना चुनौती है। किसानों को सलाह है कि जिन इलाकों में धान की रोपाई होनी है, वहां हल चला दें। इससे जमीन में खतरनाक कीट का प्यूपा अपने आप खत्म हो जाएगा।
डा राहुल कटोच, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि



