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ब्रह्मर्षी वशिष्ठ महाभारतीय आध्यात्मिक परंपरा के अनन्य प्रणम्य पुरुष हैं. डॉ .इंद्रेश कुमार

एक भारत, श्रेष्ठ भारत: विकसित भारत के परिकल्पना विषय पर संगोष्ठी आयोजित

 

धर्मशाला, ब्यूरो (न्यूज़ अजब गजब):-

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ और विश्वविद्यालय के हिंदी भाग के संयुक्त तत्वावधान में महर्षि वशिष्ठ सम्मान – 2024 और स्वामी सत्यानंद सोक्स सम्मान – 2023 प्रदान किया गया। एक विशेष कार्यक्रम में यह सम्मान दिया गया। इस मौके पर एक भारत, श्रेष्ठ भारत: एक विकसित भारत का परिकल्पना पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया । विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इसमें हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, राजनेता, विशिष्ट लेखक माननीय शांता कुमार जी बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे । उन्होंने प्रदीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम का श्री गणेश किया । इस अवसर पर विशिष्ट लेखक व चिंतक डॉ. इंद्रेश कुमार को प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र के साथ-साथ विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ की ओर से ब्राह्मर्षी वशिष्ठ सम्मान- 2024 से सम्मानित किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने विश्वविद्यालय की ओर से प्रशस्ति पत्र और चंबा की पारंपरिक हस्तकला प्रदान करके उन्हें सम्मानित किया । अपने वक्तव्य में डॉक्टर इंद्रेश कुमार ने यह कहा कि भारत में भौगोलिक विविधता दिखाई पड़ती है, बावजूद इसके इसकी सांस्कृतिक विरासत एक है। इसीलिए वह अनन्य है, अनूठी है । हम यहीं से, इन्हीं बातों से विकसित भारत की परिकल्पना कर सकते हैं। उन्होंने रामचंद्र व माता शबरी के प्रसंग के जरिए रामायणयुगीन समाज की महान सामाजिक पृष्ठभूमि की व्याख्या की थी। उन्होंने आगे कहा था कि मैं अपने जीवन में कभी ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के समान बन सकूंगा, ऐसी कल्पना मैं नहीं कर पा रहा हूं । इस सम्मान ने मेरी जिम्मेदारी को बढ़ा दिया है । इस मौके पर दूसरी बार स्वामी सत्यानंद स्कोक्स सम्मान प्रदान किया गया था । यशवंत सिंह परमार उद्यान खेती और वन विज्ञान विश्वविद्यालय नौणी, हिमाचल प्रदेश के कुलपति तथा वैज्ञानिक प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल को अपनी आजीवन साधना के लिए स्वामी सत्यानंद स्कोस्क सम्मान- 2023 से सम्मानित किया गया । उन्होंने स्वामी सत्यानंद ने किस तरह सेब की खेती में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला खड़ा किया था उस पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही स्वामी सत्यानंद जी किस तरह मिशनरी से हिंदू संन्यासी बने उस पर भी बड़ी ही रोचक पूर्ण शैली में विस्तार पूर्वक बताया। मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार जी ने अपने अभिभाषण में डॉ. इंद्रेश कुमार के साथ पांच दशक से अधिक समय तक उनके निजी संबंधों की स्मृतियों को सबके सामने संजोया । संगोष्ठी के विषय पर भी उन्होंने अपने विचार रखे। उनके अभिभाषण में समकालीन समाज और सभ्यता की स्थिति व गति साफ-साफ झलक रही थी। बतौर सम्मानित अतिथि के रूप में पधारे निर्वीसित तिब्बत सरकार के सुरक्षा मंत्री डोलमा ग्यारी ने भारतीय ही तिब्बतियों का परम मित्र है ऐसा कहा क्योंकि भारतीय ही हमारे बुरे दिनों में हमारे साथ खड़े थे। इसीलिए उन्होंने भारतीयों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की । अपने उदार चरित्र और विशाल हृदय के लिए विश्व में भारत की एक अलग पहचान है । कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत प्रकाश बंसल ने अपने स्वागत संभाषण में अतिथियों का स्वागत किया और पिछले तीन सालों में विश्वविद्यालय ने जो – जो उपलब्धियां हासिल की हैं उनकी भी सूचना दी । शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ठाकुर ने शिक्षक संघ की उपलब्धियां गिनाईं साथ ही अध्यापकों को किस तरह सीजीसीएस सुविधा मिल सके इस ओर ध्यान देने के लिए कुलपति जी से अनुरोध किया । शिक्षक संघ के सचिव डॉ. गौरी शंकर साहू ने कार्यक्रम के लक्ष्य और उद्देश्य पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भगवान श्री रामचंद्र और रघुकुल के कुलगुरु ब्रह्मर्षी वशिष्ठ की कहानी यह दर्शाती है कि सत्ता को किस तरह धर्म, ज्ञान और विद्वानों का सम्मान करना चाहिए । यह प्रसंग इसका एक जीता जागता नमूना है । समाज के प्रति विद्वानों का क्या कर्तव्य है, इसे अगर देखना है तो वशिष्ठ जी को देख लेना चाहिए। वशिष्ठ विद्वानों के उत्तरदायित्व बोध के प्रतीक हैं। उनके सम्मान के लिए शिक्षक संघ की तरफ से प्रतिवर्ष यह सम्मान प्रदान किया जाता है। भारत के पहले सेब किसान स्वामी सत्यानंद महाभारतीय आध्यात्मिक परंपरा के उदाहरण हैं । मशीनरी सैमुअल का संन्यासी बनना कोई छोटी बात नहीं है।आज का यह आयोजन उन्हें समर्पित है। इस मौके पर अधिष्ठाता, शैक्षणिक, प्रोफेसर प्रदीप कुमार, कुलसचिव प्रोफेसर सुमन शर्मा व हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष को भी संघ की तरफ से प्रतीक चिन्ह और टोपी प्रदान करके सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का संयोजन प्रोफेसर इंदर सिंह ठाकुर ने किया और अतिथियों को धन्यवाद देने के काम प्रोफेसर प्रदीप कुमार ने किया। विश्व विद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर संघ के पदाधिकारियों, जनसंपर्क अधिकारी, शोध छात्रों, छात्रों, तिब्बती लोगों के उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।🌹🌹🌹

Rakesh Bhardwaj

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