महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन

विषाणुजनित संक्रमण यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन को ले कर अकसर महिलाएं लापरवाही दिखाती हैं, जिस के साइडइफैक्ट्स बाद में स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलें खड़ी कर देते हैं। इस से निबटने के तरीके जानने बेहद जरूरी है।
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन या यूटीआई (यह ट्रैक्ट शरीर से मुख्यरूप से किडनी, यूरेटर ब्लैडर और यूरेथरा से मूत्र निकालता है) एक प्रकार का विषाणुजनित संक्रमण है. यह ब्लैडर में होने वाला सब से सामान्य प्रकार का संक्रमण है, लेकिन कई बार मरीजों को किडनी में गंभीर प्रकार का संक्रमण भी हो सकता है जिसे पाइलोनफ्रिटिस कहते हैं।
यौनरूप से सक्रिय महिलाओं में यह अधिक होता है क्योंकि यूरेथरा सिर्फ चार सैंटीमीटर लंबा होता है और जीवाणु के पास ब्लैडर के बाहर से ले कर भीतर तक घूमने के लिए इतनी ही जगह होती है। डायबिटीज होने से मरीजों में यूटीआई होने का खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है।
डायबिटीज से बढ़ता है जोखिम
डायबिटीज के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, इसलिए शरीर जीवाणुओं, विषाणुओं और फुंगी से मुकाबला करने में अक्षम हो जाता है। इस वजह से डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को अकसर ऐसे जीवाणुओं की वजह से यूटीआई हो जाता है। इस में सामान्य एंटीबायोटिक काम नहीं आते हैं।
लंबी अवधि की डायबिटीज ब्लैडर को आपूर्ति करने वाली नसों को प्रभावित कर सकती हैं। जिस की वजह से ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, जो यूरिनरी सिस्टम के बीच सिग्नल को प्रभावित कर ब्लैडर को खाली होने से रोक सकती हैं। परिणामस्वरूप, मूत्र पूरी तरह से नहीं निकल पाता है और इस की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
मेटाबोलिक नियंत्रण खराब होने से डायबिटीज से पीड़ित मरीज में किसी प्रकार के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।
कुछ नई एंटीडायबिटीक दवाओं की वजह से मामूली यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन हो सकता है।



