स्वास्थ्य

ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े लक्षण, जिनके बारे में न जानते हों आप

ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे बड़ा आम कैंसर बन गया है। भारत में सबसे ज्यादा महिलाएं इस कैंसर की चपेट में आ जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर आठ में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर की शिकार हो जाती हैं। इस कैंसर के परीक्षण के लिए सही समय पर जांच करवा लेनी चाहिए।
निपल की स्किन उतरने लगे या पपड़ी जम जाए।
ब्रेस्ट सिकुड़ जाए या उसमें गड्ढा बन जाए।
एक या दोनों ब्रेस्ट की शेप या साइज बदल जाए।
ब्रेस्ट मिल्क के अलावा किसी और तरह का डिस्चार्ज होने लगे।
ब्रेस्ट में सूजन आ जाए या फिर लगातार खुजली होने लगे, तो फिर यह ब्रेस्ट कैंसर की निशानी हो सकती है।
स्किन पर गड्ढा पडऩे या फिर उसका सिकुडऩा वैसे तो ब्रेस्ट कैंसर का आम लक्षण नहीं है। अगर इस स्थिति को नजरअंदाज किया जाए, तो धीरे-धीरे यह ब्रेस्ट कैंसर का रूप ले सकता है। ब्रेस्ट की स्किन में गड्ढे पडऩे की स्थिति में ब्रेस्ट रेड हो जाती है, सूजन आ जाती है वह मोटी हो जाती है। यहां तक कि निपल या तो बाहर या फिर अंदर की तरफ हो जाता है।
कैंसर का रिस्क, तुरंत करें डायट से बाहर असर न सिर्फ हमारे वजन, त्वचा और बालों पर पड़ता है, बल्कि हमारी ओवरऑल हेल्थ भी खाने-पीने की आदतों से ही जुड़ी है। आसानी से मिलने वाले इस तरह के खाने का हमारे शरीर पर क्या असर पड़ रहा है। खान-पान की गलत आदतों की वजह से कैंसर जैसी बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं उन फूड आइटम्स के बारे में जिनसे आप जितनी दूरी बनाएंगे, आपकी सेहत के लिए उतना ही अच्छा रहेगा….
अगर आप इस तरह की बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो फ्रेंच फ्राइज जैसी चीजें जिसमें सैच्युरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है का सेवन करना बंद कर दें।
चाय और कॉफी पसंद करने वाले सतर्क हो जाएं। वैसे तो चाय या कॉफी पीने से बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होता, लेकिन अगर आपको अपनी कॉफी या चाय हद से ज्यादा गर्म पसंद है, तो आप खुद को गले से पेट तक जाने वाली नली के कैंसर के खतरे की ओर धकेल रहे हैं। अगर आप अपने गले को लगातार उच्च तापमान के संपर्क में ला रहे हैं, तो खाने-पीने वाली नली में ट्यूमर विकसित होने का खतरा रहता है।
यह उन लोगों के लिए है जिनका खाना एक बोतल कोल्ड ड्रिंक पिए बिना नीचे ही नहीं उतरता। आपको जानकर हैरानी होगी कि आपकी फेवरिट सॉफ्ट ड्रिंक कैन में दस चम्मच चीनी होती है। अगर आप डायट सोडा के ऑप्शन पर जा रहे हैं तब भी आर्टिफिशल स्वीटनर की वजह से कैंसर का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। सॉफ्ट ड्रिंक में मौजूद आर्टिफिशल स्वीटनर की वजह से सिर्फ कैंसर ही नहीं बल्कि स्ट्रोक और मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसमें कोई शक नहीं कि प्रोसेस्ड मीट हमारी सेहत के लिए बहुत खराब है। आप शायद यह न जानते हों, तो हम आपको बता दें कि सलामी और बेकन जैसे प्रोसेस्ड मीट में तो नाइट्राइट और नाइट्रेट की मात्रा भी बहुत ज्यादा होती है और इस तरह के केमिकल्स कई तरह का कैंसर उत्पन्न करने के खतरे से सीधे तौर पर जुड़े हैं।
माइक्रोवेव में तीन मिनट में तैयार होने वाले रेडीमेडी पॉपकॉर्न भी सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। दरअसल, दिक्कत पॉपकॉर्न से नहीं बल्कि उस पैकेट से है, जिसमें पॉपकॉर्न का दाना रखा जाता है ताकि वे एक दूसरे से चिपके नहीं। जब आप उस पॉपकॉर्न वाले बैग को माइक्रोवेव में डालते हैं, तो पैकेट में मौजूद केमिकल्स पॉपकॉर्न तक पहुंच जाते हैं जिसमें से एक परफ्लोरिनेटेड कंपाउंड हैं, जो कैंसर बनाने के लिए जाना जाता है।

Rakesh Bhardwaj

A good reader or viewer is a person who is alert about her newspaper or news channel. A good reader or viewer will never waste her hard-earned money in watching or reading just anything. She is serious. She will have to think if the news she is consuming is journalism or sycophancy...

Rakesh Bhardwaj

A good reader or viewer is a person who is alert about her newspaper or news channel. A good reader or viewer will never waste her hard-earned money in watching or reading just anything. She is serious. She will have to think if the news she is consuming is journalism or sycophancy...

Related Articles

Back to top button