चरणामृत पीने से दूर होता है किसी भी सांप का विष

कांगड़ा में नागणी माता का मंदिर है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इनसान को चाहे कितने भी जहरीले सांप ने क्यों न काटा हो इस मंदिर से निकलने वाली जलधारा को पीने से वह सही हो जाता है। सांप के काटने का इलाज होने के नाते भक्तों के बीच यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। लोग काफी दूर-दूर से यहां अपना इलाज कराने आते हैं।
नूरपुर से आठ किलोमीटर पठानकोट-मनाली सड़क पर देर भड़वार गांव के साथ लगता एक छोटा सा गांव है, जो केवल नागणी माता के नाम से ही प्रसिद्व है। यहां नागणी माता का एक भव्य मंदिर है। यहां एक पवित्र जलधारी निकलती है। बताया जाता है कि सदियों से सांप के काटे जाने पर इस देवस्थल में प्रस्फुटित जलधारा के पानी पीने से उपचार होता है। कितने भी जहरीले सांप का काटा हो यदि जीवित मंदिर तक पहुंचा जाए, तो वह कदापि नहीं मरता। यह सारा चमत्कार नागणी मां की निकलने वाली जलधारा के पानी का माना जाता है जिसे पीने से इनसान स्वस्थ हो जाता है।
नागणी मां का जिक्र है रामायण में
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष बलवीर सेन ने नागणी मंदिर ज्ञानरथ नाम की एक किताब लिखी है जिसमें उन्होंने नागणी माता को देवी सुरसा कहा गया है जिसका उल्लेख तुलसीदास ने रामायण में किया है, जिसके अनुसार सुरसा को सर्पों की माता बताया गया है। इस मंदिर में हर शनिवार और मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। सावन के महीने में यहां हर साल मेला लगता है।



