सावन के महीने होते हैंभक्तों को नाग देवता दर्शन

हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला इन दिनों नाग देवता के जयघोष से गूंज रहा है। देहरा के रानीताल में दो महीने चलने वाले सावन माह मेले शुरू हो गए हैं। यहां प्रत्यक्ष रूप में भक्तों को नाग देवता दर्शन भी देते हैं। यहां की मान्यता है कि जिस किसी को भी सांप, बिच्छू काट ले तो मात्र तीन बार परिक्रमा कर काटे गए स्थान पर धागा बांधकर और यहां की चमत्कारी मिट्टी का लेप लगाने से व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है। बताया जाता है कि रानीताल के चेलियां गावं में स्थित नाग मंदिर में नाग देवता भक्तों को दर्शन भी देते हैं। भक्त यहां की चमत्कारी मिट्टी अपने साथ अपने घर ले जाते हैं।
चमत्कारी मिट्टी को अगर भक्त अपने घर के आस-पास पानी में घोल कर छिड़कें तो जहरीले सांप, बिच्छू घर में नहीं घुसते. साथ ही सांप-बिच्छू आदि के काटने का भय भी नहीं रहता। किसी को काल सर्प योग हो, तो वह यदि शेष नाग देवता का दर्शन कर ले तो उसे इस योग से निजात मिल जाता है।
मनोकामना पूरी होती है नाग देवता पके मंदिर
भक्त यहां की चमत्कारी मिट्टी प्रसाद के रूप में ले जाते हैं। उन्हें सांप के काटने का भय नहीं रहता और सांप के काटे पर मिट्टी को लगाने और मिट्टी को खाने से जहरीले विष से निजात मिल जाती है। यहां मंदिर में नाग देवता को नमक चढ़ाया जाता है, आटा चढ़ाया जाता है। जिससे रोट बनाया जाता है।
मान्यता है कि श्रद्धालु नाग देवता से जो भी मनोकामना करते हैं वह पूरी हो जाती है।
नाग देवता की पूजा के बाद दिए जाने वाले प्रसाद में चमत्कारी मिट्टी के लेप से और चमत्कारी धागा बांधने से जहरीले विष से निजात मिल जाती है। सावन का महीना शुरू होते ही यहां दो महीने मेले लगते हैं। श्रद्धालु नाग देवता से मन्नत मांगते हैं।



