रावण न की होती गलती तो यह प्रसिद्ध धाम हिमाचल में न होकर श्रीलंका में होता

हिमाचल देवी-देवताओं तथा ऋषि-मुनियों के धार्मिक स्थलों के लिए विख्यात है। वर्ष भर लगने वाले पारंपरिक मेलों के कारण हिमाचल प्रदेश अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं…
हिमाचल देवी-देवताओं तथा ऋषि-मुनियों के धार्मिक स्थलों के लिए विख्यात है। वर्ष भर लगने वाले पारंपरिक मेलों के कारण हिमाचल प्रदेश अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। इन देवस्थानों पर लगने वाले मेले प्राचीन परंपराओं को आज भी जीवंत बनाए हुए एक मिसाल बने हुए हैं। मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में सुंदर पहाड़ी स्थल पालमपुर के पास स्थित है। बैजनाथ शिव मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से आने वाले लोगों की धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। यह मंदिर वर्षभर पूरे भारत से आने वाले भक्तों, विदेशी पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों की एक बड़ी संख्या को आकर्षित करता है।
बैजनाथ शिव मंदिर उत्तर भारत का प्रसिद्ध धाम है। यहां पूरा वर्ष पर्यटकों का तांता लगा रहता है। विशेषकर शिवरात्रि में यहां का नजारा ही अलग होता है। शिवरात्रि को सुबह से ही मंदिर के बाहर भोलेनाथ के दर्शनों के लिए हजारों लोगों का मेला लगा रहता है। इस दिन मंदिर के साथ बहने वाली बिनवा खड्ड पर बने खीर गंगा घाटम स्नान का विशेष महत्व है। श्रद्धालु स्नान करने के उपरांत शिवलिंग को पंचामृत से स्नान करवा कर उस पर बिल्व पत्र, फूल, भांग, धतूरा इत्यादि अर्पित कर भोले बाबा को प्रसन्न करके अपने कष्टों एवं पापों का निवारण कर पुण्य कमाते हैं।
एक कथा के अनुसार लंका के राजा रावण ने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की तपस्या की। कोई फल न मिलने पर दशानन ने घोर तपस्या प्रारंभ की तथा अपना एक-एक सिर काट कर हवन कुंड में आहूति देकर शिव को अर्पित करना शुरू किया। दसवां और अंतिम सिर कट जाने से पहले शिवजी ने प्रसन्न होकर रावण का हाथ पकड़ा लिया। उसके सभी सिरों को पुनस्थापित कर शिव ने रावण को वर मांगने को कहा।
रावण ने कहा कि आपके शिवलिंग स्वरूप को लंका में स्थापित करना चाहता हूं। आप दो भागों में अपना स्वरूप दें और मुझे अत्यंत बलशाली बना दें। शिवजी ने तथास्तु कहा और लुप्त हो गए। लुप्त होने से पहले शिव जी ने अपने शिवलिंग स्वरूप दो चिन्ह रावण को देने से पहले कहा कि इन्हें जमीन पर न रखना।



