धर्म

Himachal Update – भागने की कोशिश करता है ये चमत्कारी घड़ा, जंजीरों में बंध कर भी करता है लोगों का भला।

प्राचीन मंदिर का निर्माण 700-800 वर्ष पहले हुआ था।

शिमला ।

मान्यता है कि जुब्बल कोटखाई में मां हाटेश्वरी का प्राचीन मंदिर है। यह शिमला से लगभग 110 किमी. की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण 700-800 वर्ष पहले हुआ था।माता हाटेश्वरी का मंदिर विशकुल्टी , राईनाला और पब्बर नदी के संगम पर सोनपुरी पहाड़ी पर स्थित है।

क्या है मान्यता –

मंदिर के बाहर प्रवेश द्वार के बाईं ओर एक ताम्र कलश लोहे की जंजीर से बंधा है जिसे स्थानीय भाषा में चरू कहा जाता है, चरू के गले में लोहे की जंजीर बंधी है। बताया जाता है कि इस जंजीर का दूसरा सिरा मां के पैरों से बंधा है।मान्यता है कि सावन भादों में जब पब्बर नदी में अत्यधिक बाढ़ आती है तब हाटेश्वरी मां का यह चरू सीटियों की आवाज निकालता है और भागने का प्रयास करता है। इसलिए चरू को मां के चरणों के साथ बांधा गया है।लोककथाओं के मुताबिक मंदिर के बाहर दो चरू थे, लेकिन दूसरी ओर बंधा चरू नदी की ओर भाग गया था। पहले चरू को मंदिर पुजारी ने पकड़ लिया था।

चरू से भोजन खत्म नहीं होता था-

बता दें कि चरू पहाड़ी मंदिरों में कई जगह देखने को मिलते हैं। इनमें यज्ञ के दौरान ब्रह्मा भोज के लिए बनाया गया हलवा रखा जाता है।कहा जाता है कि हाटकोटी मंदिर की परीधि के ग्रामों में जब कोई विशाल उत्सव, यज्ञ, शादी का आयोजन किया जाता था, तो हाटकोटी से चरू लाकर उसमें भोजन रखा जाता था।कितना भी बांटने के बाद चरू से भोजन खत्म नहीं होता था।

Rakesh Bhardwaj

A good reader or viewer is a person who is alert about her newspaper or news channel. A good reader or viewer will never waste her hard-earned money in watching or reading just anything. She is serious. She will have to think if the news she is consuming is journalism or sycophancy...

Rakesh Bhardwaj

A good reader or viewer is a person who is alert about her newspaper or news channel. A good reader or viewer will never waste her hard-earned money in watching or reading just anything. She is serious. She will have to think if the news she is consuming is journalism or sycophancy...

Related Articles

Back to top button