शादी के बाद क्यों पहननी चाहिए पायल और बिछिया

शादी के बाद पहने जाने वाले गहनों में पायल और बिछिया को विशेष महत्व दिया गया है। इन दो जेवरों को पहनने के पीछे पारंपरिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक पक्ष का भी उदाहरण दिया जाता है। शादी के बाद वधू के रूप में एक लड़की की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उसपर अपने ससुराल को बेहतरीन तरीके से संभालने और वंश को आगे लेकर जाने की जिम्मेदारी होती है। इन सबमें किसी तरह की परेशानी न आए और दुल्हन का जीवन तमाम खुशियों से भरा हो इसके लिए ही तमाम तरह के गहनों को पहनने की परंपरा है। इसलिए सभी प्रकार के गहनों का अपना-अपना महत्व और प्रभाव बताया जाता है।
‘पायल बचाती है नकारात्मकता से
शादी के बाद पहने जाने वाले गहनों में पायल बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। परंपराओं के अनुसार सुहागिन को आजीवन पायल पहनना चाहिए। दूसरा इसका वैज्ञानिक कारण है इसकी पॉजीटिव एनर्जी। पायल में लगे घुंघुरूओं से निकलने वाली आवाज को क्रिया शक्ति कहते हैं। कहा जाता है कि जब यह आवाज वातावरण में गूंजती है, तो इसे धारण करने वाले को यह निगेटिव एनर्जी से बचाती है। इसके साथ ही यह एक रक्षा कवच जैसा बना देती है जो कि सुहागन को बुरी नजर से बचाती है।
हड्डियों को मजबूत बनाती है ‘पायलÓ
पायल को पहनने के पीछे एक तर्क यह भी दिया जाता है कि इससे हड्डियां मजबूत होती हैं। ज्योतिषशास्त्र में सूर्य, चंद्रमा और शनि से भी हड्डियों के मजबूत और कमजोर होने का विचार किया जाता है। इसलिए कहा जाता है कि पायल धारण करने से हड्डियों में मजबूती आती है। कहते हैं कि पायल जब पैरों पर रगड़ती है, तो ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहता है इससे हड्डियों को भी लाभ पहुंचता है। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि यदि किसी विवाहिता के पैरों में सूजन आ जाए और वह पायल पहन ले तो यह समस्या दूर हो सकती है।
पायल को लेकर आध्यात्मिक मान्यता
चांदी शरीर को ठंडा रखती है। यही वजह है कि पायल चांदी की ही पहनी जाती है। ताकि यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखे। पायल को लेकर आध्यात्मिक मान्यता यह है कि यदि किसी महिला का स्वास्थ्य अत्यंत खराब रहता है तो पायल पहनने से उसकी सेहत में सुधार आने लगता है। दरअसल ज्योतिषीय मत है कि चांदी धारण करने से चंद्रमा को बल मिलता है, जो स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।



